Madhepura:भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग में मंगलवार को “शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (NPST)” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता सह मुख्य अतिथि प्रो० (डॉ०) चंद्र प्रकाश सिंह, प्रोफेसर इंचार्ज, शिक्षाशास्त्र विभाग एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग रहे।

सेमिनार के मुख्य वक्ता प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. प्रिंस फिरोज अहमद (फिरोज मंसूरी) थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता एवं कार्यक्रम अध्यक्ष द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ किया गया। इसके बाद एम.एड. की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया तथा एम.एड. एवं बी.एड. के विद्यार्थियों ने अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।

प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रिंस फिरोज अहमद ने की, जबकि सदस्य के रूप में डॉ. वीर बहादुर एवं डॉ. राम सिंह यादव उपस्थित रहे। अपने संबोधन में डॉ. फिरोज अहमद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सामाजिक न्याय की राजनीति की वास्तविक कसौटी शिक्षा व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा की गुणवत्ता समान नहीं होगी, सामाजिक न्याय केवल नारा बनकर रह जाएगा। उन्होंने ग्रामीण एवं वंचित तबकों के बच्चों के लिए योग्य शिक्षकों की कमी पर चिंता जताई और NPST को शिक्षक नियुक्ति, प्रशिक्षण एवं पदोन्नति से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

इस दौरान डॉ. राम सिंह यादव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. वीर बहादुर ने NCTE द्वारा निर्धारित मानकों की विस्तृत जानकारी दी। इस सत्र में कुल 17 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

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द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता बी.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार ने की। उन्होंने पेशेवर नैतिकता पर जोर देते हुए ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, जवाबदेही, सम्मान, गोपनीयता, अनुशासन, समर्पण और सहनशीलता को एक शिक्षक के अनिवार्य गुण बताया। इस सत्र में भी 17 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की संयोजक डॉ. माधुरी कुमारी ने सेमिनार की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और विचार अभिव्यक्ति को सशक्त बनाते हैं। विषय प्रवेश डॉ. शैलेश यादव ने कराया, जिन्होंने राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों एवं शिक्षकों के नैतिक दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की।
एम.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. शिवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों के लिए निर्धारित व्यावसायिक मानकों के अंतर्गत निरंतर प्रशिक्षण, क्रेडिट स्कोर एवं शॉर्ट टर्म प्रोग्राम अत्यंत आवश्यक हैं। वहीं मुख्य अतिथि प्रो० (डॉ०) सी.पी. सिंह ने उद्घाटन उद्बोधन में विद्यार्थियों को तर्कसंगत, विचारवान एवं संवादशील बनने का आह्वान किया और कहा कि वर्तमान व भविष्य में बी.एड., डी.एल.एड., एम.एड. एवं ITEP जैसे पाठ्यक्रम पूर्ण करने के बाद ही शिक्षक बनने की पात्रता सुनिश्चित होगी।
सेमिनार में शोध पत्र प्रस्तुति के आधार पर अभिषेक कुमार को प्रथम, ऋषि राज को द्वितीय तथा छोटू कुमार को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। सभी विजेताओं को मेडल देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. शिवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, मंचासीन अतिथियों एवं उपस्थित विद्यार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डॉ. अंजू प्रभा, श्री रॉबिंस कुमार, श्री संतोष कुमार सहित बड़ी संख्या में बी.एड. एवं एम.एड. के विद्यार्थी उपस्थित रहे।






