Madhepura:पटना स्थित बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के कुलसचिव महोदय द्वारा एक छात्र की लंबित समस्या का समाधान किए जाने का मामला सामने आया है। बी पी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज, मधेपुरा के पूर्व छात्र विभांषु कुमार ने बताया कि उन्हें प्रतियोगिता परीक्षा में आवेदन के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत थी, जिसे ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य था।
विभांषु कुमार के अनुसार, जब उन्होंने कॉलेज प्रशासन से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि दस्तावेज विश्वविद्यालय से निर्गत होंगे। इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया। वहां मौजूद क्लर्क ने उनकी बात सुनकर आश्वासन दिया कि मामला संबंधित अधिकारी तक पहुंचा दिया जाएगा। हालांकि दो-तीन दिन इंतजार के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला।
इसके पश्चात उन्होंने विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें विश्वविद्यालय आने के लिए कहा। विश्वविद्यालय पहुंचकर उन्होंने रजिस्टर में अपना विवरण दर्ज कराया। सहायक कुलसचिव के निर्देश पर वे उप परीक्षा नियंत्रक से मिले, जहां उन्हें एक सप्ताह के भीतर दस्तावेज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। लेकिन निर्धारित समय सीमा के बाद भी दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए।
विभांषु कुमार का कहना है कि इस दौरान उन्होंने कई पदाधिकारियों से संपर्क किया, परंतु कुछ अधिकारियों ने इसे अपने कार्यक्षेत्र से बाहर बताया, तो कुछ ने फोन रिसीव नहीं किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों को छात्रों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी अधिकारी ऐसे नहीं हैं, बल्कि कुछ पदाधिकारी गंभीरता से सुनते और समाधान करते हैं।
अंततः उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रदीप कुमार (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी) से संपर्क किया। कुलसचिव ने उनकी समस्या को विनम्रता से सुना और शीघ्र समाधान कराया। बाद में स्वयं फोन कर उन्हें सूचित किया कि उनका कार्य पूरा हो गया है।
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विभांषु कुमार ने कुलसचिव महोदय के प्रति तहेदिल से धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे ईमानदार और संवेदनशील अधिकारी ही छात्रों के विश्वास को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि वे भी भविष्य में एक ईमानदार अधिकारी बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं।
उन्होंने अन्य विद्यार्थियों से अपील की कि यदि कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हो रहा हो तो हताश न हों, बल्कि संबंधित उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखें। प्रयास करने पर समाधान अवश्य मिलता है।
उन्होंने बताया कि उनकी समस्या लगभग डेढ़ माह से लंबित थी। यदि वे पहले ही कुलसचिव महोदय से संपर्क कर लेते तो संभवतः समाधान पहले ही हो जाता। अंत में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेषकर कुलसचिव महोदय के प्रति पुनः आभार व्यक्त किया।





