Madhepura:आज का युग भौतिक प्रगति का युग है। विज्ञान, तकनीक और सुविधाओं के क्षेत्र में मानव ने अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हासिल की हैं, लेकिन इसके बावजूद मनुष्य के जीवन में सुख और शांति का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है। इसी सच्चाई की ओर ध्यान आकर्षित करता है ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्थापक पिता श्री ब्रह्मा बाबा का जीवन और उनका संदेश।
ब्रह्मा बाबा की स्मृति में मधेपुरा के गुलजार बाग, वार्ड संख्या–21 में विश्व शांति दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र की प्रभारी आदरणीय रंजू दीदी ने सारगर्भित शब्दों में कहा कि “ब्रह्मा बाबा को स्मरण करना मात्र एक दिवस मनाना नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”
ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय आज विश्व के 144 देशों में आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश फैला रहा है। इस संस्था के माध्यम से करोड़ों आत्माओं ने अपने जीवन में आंतरिक शांति, सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों का अनुभव किया है। संस्था को लोग स्नेहपूर्वक “ओम शांति” के नाम से जानते हैं—जो आत्मिक शांति का प्रतीक है।
सम्बंधित ख़बरें
इस संस्था का मूल उद्देश्य है मनुष्य को देवतुल्य बनाना, अर्थात उसके भीतर छिपे दैवीय गुणों—प्रेम, शांति, पवित्रता, सहनशीलता और करुणा—का जागरण कराना। ब्रह्माकुमारी संस्था मनुष्य को केवल उपदेश नहीं देती, बल्कि उसे जीवन जीने की कला सिखाती है।
आज की विडंबना यह है कि मनुष्य ने घर, व्यापार, व्यवस्था और संबंधों को तो “सेट” कर लिया है, लेकिन अपने मन को सेट करना भूल गया है। इसी कारण संपन्नता के बावजूद जीवन में तनाव, अशांति और असंतोष बढ़ता जा रहा है। ब्रह्मा बाबा का संदेश स्पष्ट है—जब तक मन शांत नहीं होगा, तब तक बाहरी सुख भी टिकाऊ नहीं हो सकता।
विश्व शांति दिवस हमें यह याद दिलाता है कि विश्व में शांति की शुरुआत आत्मा की शांति से होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर शांति, सद्भाव और सकारात्मकता को विकसित करे, तो संपूर्ण समाज और विश्व स्वतः शांतिपूर्ण बन सकता है।
