Madhepura:विश्वविद्यालय की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने गुरुवार को कुलपति प्रो. बी.एस. झा को दस सूत्री मांग-पत्र सौंपा। परिषद ने मांगों पर 31 अगस्त 2026 तक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। निर्धारित समय सीमा में मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

अभाविप के राज्य विश्वविद्यालय कार्य संयोजक सौरभ यादव एवं विभाग संयोजक नवनीत सम्राट ने कहा कि पिछले दो वर्षों में विश्वविद्यालय की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए वर्तमान कुलपति को कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में परिषद ने अंतिम रूप से दस सूत्री मांग-पत्र सौंपा है।
*यूआईएमएस में गड़बड़ी की जांच की मांग
परिषद ने मांग-पत्र में विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (यूआईएमएस) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेताओं का कहना है कि कंपनी ने विश्वविद्यालय से हुए करार के अनुरूप निर्धारित सभी मॉड्यूल पर कार्य नहीं किया है। साथ ही यूआईएमएस एजेंसी द्वारा छात्र-छात्राओं के डेटा के कथित दुरुपयोग तथा नामांकन एवं परीक्षाफल प्रकाशन में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही हैं। परिषद ने पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
*समान शुल्क लागू करने की मांग
दूसरे बिंदु में सभी महाविद्यालयों एवं स्नातकोत्तर विभागों में राज्यपाल सचिवालय, लोकभवन, पटना द्वारा निर्धारित एक समान शुल्क लागू करने की मांग की गई है। परिषद ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों तथा सभी वर्गों की छात्राओं से शुल्क नहीं लेने के प्रावधान का अनुपालन सुनिश्चित कराने की भी मांग की।
इसके अलावा कॉलेज इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (सीआईएमएस) के नाम पर विद्यार्थियों से विभिन्न महाविद्यालयों में लिए जा रहे 100 रुपये अतिरिक्त शुल्क पर रोक लगाने की मांग की गई।
*प्रमाण-पत्र शुल्क वृद्धि वापस लेने की मांग
परिषद ने विश्वविद्यालय द्वारा मूल प्रमाण-पत्र, प्रवजन प्रमाण-पत्र समेत विभिन्न प्रमाण-पत्रों के शुल्क में की गई वृद्धि को वापस लेने की मांग की। नेताओं के अनुसार, जिस प्रमाण-पत्र के लिए पहले 200 रुपये शुल्क निर्धारित था, उसे बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया है। परिषद ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान के बावजूद कई विद्यार्थियों को उनके पते पर प्रमाण-पत्र नहीं भेजा गया है।
मांग की गई कि बढ़ा हुआ शुल्क वापस लेकर शुल्क पूर्ववत किया जाए तथा जिन विद्यार्थियों से अतिरिक्त राशि ली गई है, उन्हें राशि लौटाई जाए। साथ ही विद्यार्थियों की सहायता के लिए विद्यार्थी सेवा केंद्र एवं सिंगल विंडो सिस्टम शुरू करने की मांग की गई।
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*पेयजल, शौचालय और पुस्तकालय की व्यवस्था हो
परिषद ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक परिसरों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। दोनों परिसरों में शुद्ध पेयजल एवं पर्याप्त शौचालय की व्यवस्था करने के साथ विश्वविद्यालय केंद्रीय पुस्तकालय एवं स्नातकोत्तर विभागों के पुस्तकालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नए पाठ्यक्रम की पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की गई। प्रशासनिक परिसर में निर्मित यूजीसी गर्ल्स हॉस्टल को भी अविलंब चालू कराने की मांग रखी गई।
*मुकदमे वापस लेने और लोकतांत्रिक माहौल बनाने की मांग
पांचवें बिंदु में सभी विद्यार्थियों का निलंबन समाप्त करने तथा विद्यार्थियों पर दर्ज मुकदमों को बिना शर्त सम्मानपूर्वक वापस लेने की मांग की गई। परिषद ने विश्वविद्यालय में स्वस्थ एवं लोकतांत्रिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की।
इसके अलावा राज्यपाल सचिवालय के निर्देशों के आलोक में शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों की समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए शिकायत निवारण कोषांग गठित करने तथा समर्थ पोर्टल पर शिकायत निवारण मॉड्यूल चालू करने की मांग की गई।
परिषद ने ‘एक व्यक्ति-एक पद’ की व्यवस्था लागू करने, शिक्षकों के दंडात्मक स्थानांतरण एवं बदले की भावना से की गई एकतरफा कार्रवाई वापस लेने की भी मांग की। साथ ही वर्तमान कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार एवं कुलपति के निजी सहायक राहुल रंजन पर लगाए गए भ्रष्टाचार एवं अनैतिक कार्यों में संलिप्तता के आरोपों की जांच कराने की मांग की गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं दी गई है।
*राज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजी प्रति
अभाविप के संगठन मंत्री अभिषेक झा ने बताया कि मांग-पत्र की प्रतिलिपि राज्यपाल सह कुलाधिपति के अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, जिला पदाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी, मधेपुरा को भी भेजी गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य नेतृत्व के मार्गदर्शन में परिषद द्वारा चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। 31 अगस्त तक मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को तेज किया जाएगा।