Madhepura:भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) में संचालित इंटर्नशिप कार्यक्रम को लेकर छात्र संगठनों ने सवाल उठाए हैं। छात्र नेता अजीत यादव एवं छात्र जदयू के विश्वविद्यालय अध्यक्ष निखिल सिंह यादव ने संयुक्त रूप से कुलसचिव को ज्ञापन सौंपकर इंटर्नशिप कार्यक्रम की निष्पक्ष जांच कराने, शुल्क वसूली की समीक्षा करने और चयनित कंपनियों से विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
ज्ञापन में छात्र नेताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत इंटर्नशिप का उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान, कौशल विकास, औद्योगिक अनुभव और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। लेकिन बीएनएमयू में जिस तरीके से इंटर्नशिप संचालित की गई, उससे छात्रों में असंतोष है।
छात्र नेता अजीत यादव ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय द्वारा चयनित कुछ कंपनियों और संस्थाओं ने छात्रों को उद्योग, प्रतिष्ठित संस्थान या स्टार्टअप से जोड़ने के बजाय केवल ऑनलाइन सत्र और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से इंटर्नशिप की औपचारिकता पूरी कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल वीडियो देखने को किस आधार पर इंटर्नशिप माना जा सकता है।
उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय सार्वजनिक करे कि कितने छात्रों को फील्ड आधारित प्रशिक्षण मिला, कितने छात्रों को कंपनियों में व्यावहारिक अनुभव मिला और कितनों को रोजगार या अन्य अवसर प्राप्त हुए।
छात्र नेताओं ने कहा कि कई महाविद्यालयों में छात्रों से 300 से 600 रुपये तक इंटर्नशिप शुल्क लिए जाने की शिकायत है। उन्होंने कहा कि इंटर्नशिप शुल्क किस नियम और आदेश के तहत लिया गया, इसकी जानकारी विश्वविद्यालय को सार्वजनिक करनी चाहिए।
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छात्र जदयू विश्वविद्यालय अध्यक्ष निखिल सिंह यादव ने कहा कि चयनित सभी कंपनियों और संस्थाओं से महाविद्यालयवार विस्तृत रिपोर्ट ली जानी चाहिए। रिपोर्ट में छात्रों की संख्या, प्रशिक्षण की वास्तविक गतिविधियां, स्टाइपेंड, रोजगार के अवसर और इंटर्नशिप की पूरी प्रक्रिया का विवरण होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इंटर्नशिप की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और नोडल पदाधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। यदि छात्रों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
दोनों छात्र नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, कंपनियों से रिपोर्ट लेकर सार्वजनिक करने और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।






