:: कोसी प्रमंडल के शिक्षा विभाग में वर्ष 2006 से 2010 के बीच तत्कालीन आरडीडीई सहित तीनों डीईओ ने जमकर शिक्षक स्थानांतरण घोटाले को दिया था अंजाम
::जनसुराज जिलाध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने वर्ष 2010 से किया लगातार संघर्ष, तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार के जनता दरबार में उठाया था मामला
:: सीएम नीतीश कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निगरानी को दिया था जांच का आदेश, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पटना निगरानी थाना में आरडीडीई सहित 6 डीईओ के विरुद्ध दर्ज किया प्राथमिकी
:: 16 साल बाद 15 मई 2026 को आरोप सिद्ध होने पर तत्कालीन आरडीडीई सहित 6 डीईओ पाए गए, तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो के पेंशन से पांच प्रतिशत राशि कटौती की कार्रवाई
:: जांच में 21.12.2006 एवं 27.12.2007 की बैठकों में लिए गए सभी निर्णय पाए गए गलत, स्थानांतरण में भी गड़बड़ी की हुई पुष्टि
भ्रष्टाचार की महत्वपूर्ण तिथियां::
भ्रष्टाचार का कार्यकाल 5.08.2006 से 30.06.2010
भ्रष्टाचार उजागर की तिथि 5 अगस्त 2010
निगरानी जांच का आदेश अगस्त 2010
निगरानी जांच पूर्ण की तिथि 28.04.2011
पटना निगरानी थाना में प्राथमिकी तिथि निगरानी थाना कांड 03/12 दिनांक 9 जनवरी 2012
विभागीय कर्रवाई संचालन तिथि संकल्प संख्या 264 दिनांक 21 फरवरी 2012
संचालन पदाधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन समर्पित तिथि गैर सरकारी प्रेषन संख्या 85 दिनांक 27-08-12
शिक्षा विभाग दंड अधिरोपित तिथि दिनांक 15 मई 2026
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रिपोर्ट;अनिल कुमार सिंह
Supoul:करीब डेढ़ दशक तक चली लड़ाई आखिरकार अपने मुकाम तक पहुंच गई। वर्ष 2006 से 2010 के बीच 4 साल में तत्कालीन आरडीडीई सहित छह डीईओ द्वारा किए सभी पाप का घड़ा अंततः फूंट ही गया। कोसी प्रमंडल के शिक्षा विभाग में वर्ष 2006 से 2010 के बीच तत्कालीन आरडीडीई श्याम नारायण कुंवर सहित 6 डीईओ ने जमकर शिक्षक स्थानांतरण घोटाले को अंजाम दिया था। उस दौर में नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से शिक्षकों का तबादला किया गया, विषय विसंगति बढ़ाई गई, रिक्त पदों की अनदेखी हुई और कई विद्यालयों में स्वीकृत क्षमता से अधिक शिक्षकों की पोस्टिंग कर दी गई। आरोप यह भी लगा कि पूरे खेल में सरकारी नियमों की खुली अनदेखी करते हुए प्रभाव और पैसे के आधार पर सैकड़ो शिक्षकों के स्थानांतरण किए गए। इस मामले को लेकर जनसुराज जिलाध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने वर्ष 2010 से लगातार संघर्ष शुरू किया था। आवेदन, आरटीआई, शिकायत और दस्तावेजों के सहारे उन्होंने इस मुद्दे को जनता दरबार तक पहुंचाया। मामला जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में पहुंचा तो उन्होंने निगरानी जांच की अनुशंसा कर दी। इसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं और तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो समेत कई अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई। लंबी विभागीय कार्रवाई, निगरानी थाना कांड, जांच प्रतिवेदन, कानूनी समीक्षा और बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति के बाद आखिरकार 16 मई 2026 को आरोप सिद्ध होने पर तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनकी पेंशन से पांच प्रतिशत राशि कटौती के आदेश जारी कर दिया गया।

2010 में सीएम के जनता दरबार में दर्ज कराई गई थी शिकायत
साल 2010 में जनता दरबार में समर्पित परिवाद की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई । इसके बाद पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पत्रांक-580 दिनांक 28.04.2011 के माध्यम से जांच प्रतिवेदन शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराया गया। निगरानी जांच में कुल 6 पदाधिकारियों को दोषी पाए गए। इसमें तत्कालीन क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, कोशी प्रमंडल, सहरसा श्याम नारायण कुंवर, तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी, सहरसा महेंद्र प्रसाद सिंह, शिक्षा पदाधिकारी, मधेपुरा अवधेश कुमार सिंह, तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल रामाशीष महतो, जिला विद्यालय निरीक्षिका, सहरसा ज्योति दास और तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी, मधेपुरा नयन रंजन वर्मा शामिल थे। संकल्प में कहा गया है कि 05.08.2006 से 30.06.2010 के बीच सहायक शिक्षकों के स्थानांतरण में भारी अनियमितताएं बरती गईं। आरोप पत्र बनने के बाद विभागीय पत्रांक-1037 दिनांक 31.10.2011 द्वारा रामाशीष महतो से लिखित जवाब मांगा गया था। इसके बाद उन्होंने 23.12.2011 को अपना बचाव अभिकथन जमा किया। उन्होंने कहा था कि प्रमंडलीय स्थापना समिति में वे केवल सदस्य थे, अंतिम निर्णय का अधिकार क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक के पास था। शिक्षा विभाग ने उनके जवाब को अस्वीकार करते हुए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(ख) के तहत विभागीय कार्रवाई जारी रखी। इसके लिए विभागीय संकल्प संख्या-264 दिनांक 21.02.2012 द्वारा के.के. राय, संयुक्त सचिव, शिक्षा विभाग को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
तत्कालीन डीईओ पर क्या था आरोप
तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो पर रिक्त पद नहीं रहने के बावजूद स्थानांतरण करना, प्रमंडलीय स्थापना समिति की स्वीकृति के बिना तबादला आदेश जारी करना, निर्धारित समय सीमा पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों का स्थानांतरण, विषय विसंगति वाले शिक्षकों का तबादला, आवेदन पत्रों की अनदेखी, शिक्षकों द्वारा दिए गए विद्यालय विकल्पों को नजरअंदाज करना, वरीयता सूची की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया था। इसके फलस्वरूप विद्यालयों में स्वीकृत बल से अधिक शिक्षक पदस्थापित होने की समस्या उत्पन्न हो गई। इसके अलावा जिला इकाई से वेतन भुगतान के कारण वित्तीय अनियमितता बढ़ने का भी आरोप लगाया गया था। संचालन पदाधिकारी ने पत्र संख्या-85 दिनांक 27.08.2012 के जरिए जांच प्रतिवेदन सौंपा, जिसमें सभी आरोप प्रमाणित पाए गए।
जांच प्रतिवेदन में सामने आई अनियमितता:
जांच में कहा गया कि अधिकांश स्थानांतरण प्रत्यर्पित पदों के खिलाफ किए गए। अधिसूचना संख्या-1409 एवं 1410 दिनांक 05.08.2006 का उल्लंघन हुआ। स्थापना समिति के निर्णयों में आरोपी अधिकारी यानी तत्कालीन डीईओ की सहभागिता थी।21.12.2006 एवं 27.12.2007 की बैठकों में लिए गए निर्णय गलत पाए गए। कई आदेशों पर आरोपी अधिकारी के हस्ताक्षर भी थे। इस मामले में निगरानी विभाग द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या-003/12 दिनांक 09.01.2012 दर्ज किया गया। इस कांड में श्रामाशीष महतो को भी अभियुक्त बनाया गया था। बाद में पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पत्रांक-1352 दिनांक 02.06.2014 में बताया गया कि मामला अनुसंधानाधीन है। फिर शिक्षा विभाग ने अंतिम विभागीय पत्रांक-100768 दिनांक 27.08.2024 के जरिए अद्यतन स्थिति मांगी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-411 दिनांक 11.05.2026 द्वारा रामाशीष महतो के खिलाफ प्रस्तावित दंड पर सहमति दी गई। इसके बाद बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(ख) के अंतर्गत पेंशन से 05 प्रतिशत राशि की कटौती की जाती है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी संकल्प में कहा गया है कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में सरकारी अधिसूचना और नियमों की अनदेखी कर शिक्षकों का स्थानांतरण स्वार्थसिद्धि एवं वित्तीय अनियमितता के साथ किए जाने की पुष्टि हुई थी।
तत्कालीन आरडीडीई 2016 में ही पाए गए दोषी:
मामले में जांच के दौरान 2016 में ही तत्कालीन आरडीडीई दोषी पाए गए थे। मुख्य आरोपी श्याम नारायण कुंवर तत्कालीन क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, कोशी प्रमंडल, सहरसा के खिलाफ पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। विभागीय ज्ञापांक-272 दिनांक 24.02.2016 द्वारा उनके पेंशन से 10 प्रतिशत कटौती की सजा दी गई थी।
निवेदक : अनिल कुमार सिंह,जिलाध्यक्ष,जनसुराज पार्टी, सुपौल






