संवाददाता/रंजीत सिंह
Madhepura:बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य की द्वितीय राजभाषा उर्दू के प्रचार-प्रसार, संरक्षण एवं सर्वांगीण विकास की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। उर्दू निदेशालय द्वारा राज्य के सभी विभागों, जिला समाहरणालयों, अनुमंडलों, प्रखंडों एवं अंचल कार्यालयों में उर्दू भाषा कोषांगों के माध्यम से नागरिकों को सुगम भाषायी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

यह जानकारी उर्दू परामर्शदात्री समिति, बिहार सरकार के सदस्य डॉ. फ़िरोज़ मंसूरी ने हमारे प्रतिनिधि को दी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उर्दू निदेशालय द्वारा अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं एवं गतिविधियां प्रभावी रूप से क्रियान्वित की जा रही हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं—
प्रमुख योजनाएं एवं गतिविधियां:
उर्दू सेवी सम्मान पुरस्कार:
राष्ट्रीय स्तर पर उर्दू साहित्य की सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों एवं लेखकों को शिखर पुरस्कार एवं नामित पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।
*पाण्डुलिपि प्रकाशन अनुदान:
उर्दू लेखकों एवं कवियों की पाण्डुलिपियों के प्रकाशन हेतु अनुदान। वर्ष 2022-24 के दौरान 134 पाण्डुलिपियों पर ₹30,57,000/- की राशि व्यय की जा चुकी है।
*साहित्यिक स्मृति कार्यक्रम:
दिवंगत साहित्यकारों एवं कवियों की स्मृति को जीवंत बनाए रखने हेतु राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन।
*छात्र प्रोत्साहन अनुदान:
प्रतिभाशाली उर्दू भाषी छात्रों को वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के आधार पर ₹57,00,000/- की प्रोत्साहन राशि के साथ मेडल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा रहे हैं।
*कार्यशालाएं एवं सेमिनार:
द्वितीय राजभाषा उर्दू के प्रचार-प्रसार एवं दक्षता विकास हेतु नियमित कार्यशालाओं और सेमिनारों का आयोजन।
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*जश्न-ए-उर्दू:
राष्ट्रीय स्तर पर कवि सम्मेलन, उर्दू नाटक, मुशायरा एवं शाम-ए-ग़ज़ल जैसे साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन।
*भाषा संगम एवं मोनोग्राफ प्रकाशन:
त्रैमासिक पत्रिका ‘भाषा संगम’ का प्रकाशन तथा उर्दू साहित्यकारों के जीवन एवं कृतित्व पर आधारित मोनोग्राफ का प्रकाशन।
*उर्दू अधिगम एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम:
ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से उर्दू सीखने-बोलने के प्रशिक्षण कार्यक्रम। वर्ष 2025 में नौवीं बैच की परीक्षा संपन्न हुई है तथा दसवीं बैच जनवरी 2026 से प्रारंभ होगी।
*सरकारी कार्यक्षेत्र में उर्दू का प्रयोग:
आवेदन-पत्रों, सरकारी आदेशों, विज्ञापनों, जिला गजटों एवं संकेत-पट्टों में उर्दू भाषा का समुचित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।
*इस अवसर पर डॉ. फ़िरोज़ मंसूरी ने कहा,
> “माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की उर्दू के प्रति अपार संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के कारण बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां उर्दू को सभी प्रशासनिक स्तरों पर सम्मानजनक एवं व्यावहारिक स्थान प्राप्त हुआ है। आज उर्दू केवल साहित्य की भाषा नहीं रही, बल्कि शासन, शिक्षा और सामाजिक पहचान का सशक्त माध्यम बन चुकी है।”
उक्त बैठक में उर्दू परामर्श दात्री समिति के अध्यक्ष पूर्व मंत्री नौशाद आलम, सदस्य इम्तियाज अहमद अंसारी बुलंद अख्तर हाशमी, इसराइल लाइन असलम खान हकी समीम इकबाल प्रोफेसर शौकत अंसारी यासमीन खातून शबाना दाऊद मुर्तजा अली कैसर भी शामिल थी.
— जारीकर्ता —डॉ. फ़िरोज़ मंसूरी,सदस्य, उर्दू परामर्शदात्री समिति,बिहार सरकार।







